HINDI





ब्रितानी राज के ज़माने से, हिंदुस्तान के रंग-कर्मियों ने अपने काम से देश की विविधता का जश्न मनाया है। हमने आज़ादी की लड़ाई के लिए नाटक किए; अपनी कला के ज़रिए समाज की बुराइयों को ललकारा; समाज में बराबरी और भाईचारे के हामी रहे; पुरुष-प्रधानता, ब्राह्मणवाद और जाति-भेदभाव के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ी। मज़हबी सम्प्रदायवाद, अंध-देशभक्ति, तंग-नज़री और अंध-विश्वासों के ख़िलाफ़  खड़े होने की, हिन्दुस्तान के रंग-कर्मियों की लम्बी और गर्वपूर्ण परम्परा रही है। हम लोगों ने हाशियों पर खड़े हो कर, हाशियों की बात की है। गाने और नाच के शक्ल में, हलके- फुल्के और करुणामय रंगों में, दमदार कहानियों के ज़रिये, हमने पिछले एक सौ पचास साल से सेक्युलर, जनतंत्रीय, साझे और इंसाफ़-पसंद हिन्दुस्तान की छबि रची है।

आज हिन्दुस्तान की वही छबि ख़तरे में है। आज, गीत, नाच, हंसना-हँसाना खतरे में है। आज हमारा प्यारा संविधान ख़तरे में है। उन संस्थानों का गला घोंटा जा रहा है जिनका काम तर्क-वितर्क, वाद-विवाद और असहमति को मान्यता देना है। सवाल उठाने, झूठ को उजागर करने, और सच बोलने को 'देश-विरोधी' क़रार दिया जाता है। नफ़रत के बीज हमारे खान-पान, इबादत और त्योहारों में शामिल हो गए हैं।

जिन अलग अलग रूपों में नफ़रत हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में ख़ौफ़नाक तरीक़े से दाख़िल हो गयी है, उसको रोकना है।  आने वाले चुनाव आज़ाद हिंदुस्तान के इतिहास के सबसे अहम् चुनाव हैं। जनतंत्र का मतलब है सबसे कमज़ोर और हाशिये पर बसे इंसान को समर्थ बनाना।  बिना सवाल उठाए, बिना वाद-विवाद किए, बिना ज़िंदा विपक्ष के जनतंत्र कामयाब नहीं हो सकता। आज की सरकार जानबूझ कर इन सब को ख़त्म कर रही है।       

जो भाजपा पांच साल पहले विकास का वादा करके सत्ता में आयी, उसने हिंदुत्व के ग़ुंडों को नफ़रत और हिंसा की सियासत करने की खुली छूट दे दी। वो शख़्स जिसे पांच साल पहले देश के मसीहा की संज्ञा दी गई, उसने अपनी नीतियों से करोणों लोगों की जीविका का नाश कर दिया। उसने काला धन वापस लाने का वादा किया मगर उसके बजाय बदमाश देश को लूट कर भाग गए। देश की सम्पति में कई गुना इज़ाफ़ा हुआ मगर ग़रीब तबक़ा और भी ग़रीब हो गया।

हम हिन्दुस्तान के रंगकर्मी देश के लोगों से अपील करते हैं कि वे देश के संविधान, और हमारे साझा और सेक्युलर माहौल की हिफाज़त करें। हम अपने नागरिक साथियों से अपील करते हैं कि वे प्रेम और सदभावना, बराबरी और सामाजिक न्याय के लिए, और अन्धकार और असभ्यता की ताक़तों को हरा पाने  के लिए, अपना वोट डालें।

हमारी अपील है कि कट्टरपन, नफ़रत और निठुराई को वोट की ताक़त से हराएँ।  भाजपा और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ वोट डालें। सबसे कमज़ोर को समर्थ बनाने के लिए, आज़ादी को बचाने के लिए, पर्यावरण को बचाने के लिए, वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए वोट डालें। सेक्युलर, जनतंत्रीय और भाईचारे वाले हिन्दुस्तान के लिए वोट डालें। सपने देखने की आज़ादी के लिए वोट डालें।  सोच समझ कर वोट डालें।